🚨BIG SCAME NEWS: 🚨🔥🔥🎯“17.75 लाख की बॉउंड्री में भ्रष्टाचार की ईंटें! कापू तहसील में घटिया निर्माण, फर्जी बोर्ड और अफसरों के उलझे बयान ने खोली पोल”!🎯📢📢पढ़िए खबर,Watch Video…!🔥🔥🔴

धरमजयगढ़/कापू। ग्राम पंचायत कापू स्थित तहसील कार्यालय की बॉउंड्री वाल अब विकास नहीं, बल्कि कथित भ्रष्टाचार की मिसाल बनती नजर आ रही है। करीब 17.75 लाख रुपये की लागत से बन रही इस बॉउंड्री पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं—जहां एक तरफ घटिया ईंट और निम्नस्तरीय सीमेंट के इस्तेमाल के आरोप हैं, वहीं दूसरी तरफ पूरा मामला कागजों और जमीनी हकीकत के बीच उलझा हुआ दिख रहा है।

करीब 3 एकड़ 25 डिसमिल क्षेत्रफल में बनने वाली इस बॉउंड्री की लागत को लेकर जानकार भी हैरान हैं। उनका साफ कहना है कि इतने सीमित रकबे में इतना बड़ा बजट समझ से परे है, जो सीधे तौर पर वित्तीय गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।

सबसे बड़ा खुलासा निर्माण स्थल पर लगे बोर्ड ने कर दिया है। बोर्ड में ग्राम पंचायत कापू को निर्माण एजेंसी बताया गया है, जबकि पंचायत सचिव भुगदेव राठिया खुद इस जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। इतना ही नहीं—बोर्ड में ठेकेदार का नाम गायब है, निर्माण की शुरुआत और समाप्ति की तारीख का भी कोई जिक्र नहीं। ऐसे में यह बोर्ड पारदर्शिता नहीं, बल्कि गड़बड़ी छुपाने का जरिया नजर आ रहा है।

मामले को और संदिग्ध बनाते हैं जिम्मेदार अफसरों के विरोधाभासी बयान। तहसीलदार उनमेश पटेल का कहना है कि उन्होंने रकबा बढ़ाकर आदेश दिया है, साथ ही बोर्ड में दर्ज जानकारी की जांच की बात भी कही है। वहीं दूसरी ओर, इस निर्माण कार्य की एजेंसी आरईएस धरमजयगढ़ बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है—आखिर सच कौन बोल रहा है?

स्थानीय लोगों में इस पूरे मामले को लेकर भारी नाराजगी है। सोशल मीडिया पर भी लोग खुलकर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन प्रशासन अब तक चुप्पी साधे बैठा है। इससे यह संदेह और गहरा हो रहा है कि कहीं पूरा मामला ऊपर से नीचे तक सेटिंग का तो नहीं? Watch here Video…👇👇
गौरतलब है कि कापू क्षेत्र में पहले भी शासकीय जमीनों पर अवैध कब्जों के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती रही है। अब जब कापू को बड़े तहसील का दर्जा मिला है, तो उम्मीद थी कि व्यवस्था सुधरेगी, लेकिन यहां तो हालात और बदतर होते दिख रहे हैं।
👉सीधा सवाल—
क्या जनता के टैक्स के 17.75 लाख रुपये इस बॉउंड्री के नाम पर डकारे जा रहे हैं?
और अगर सब कुछ सही है, तो फिर इतनी गोपनीयता और विरोधाभास क्यों?
अब वक्त आ गया है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो—वरना “विकास” के नाम पर भ्रष्टाचार की ये दीवारें यूं ही खड़ी होती रहेंगी।




