🚨BIG NEWS:🚨🔥🎯 ऐश डाईक में ओवरलोडिंग का खेल! निजी पोकलेन से भर रहे हाईवा, उड़ती राख और बेलगाम रफ्तार से ग्रामीणों की सांसें अटकीं..🎯🔥📢🔥📢

🔥बिंजकोट-दर्रामुड़ा से बड़े जामपाली और कुर्रुभांठा मार्ग पर जाम, प्रदूषण और हादसों का खतरा बढ़ा; ग्रामीणों ने ओवरलोड वाहनों पर सख्त कार्रवाई की उठाई मांग।
खरसिया। खरसिया क्षेत्र के बिंजकोट-दर्रामुड़ा मार्ग पर फ्लाई ऐश परिवहन को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ ट्रांसपोर्टरों की मनमानी और मुनाफाखोरी के कारण पूरे इलाके में प्रदूषण, जाम और सड़क हादसों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ओवरलोड हाईवा, तेज रफ्तार और खुले में फ्लाई ऐश ढुलाई से आम लोगों का सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों के अनुसार, मेसर्स सारडा एनर्जी एंड मिनरल्स लिमिटेड के ऐश डाईक से बड़ी मात्रा में फ्लाई ऐश की ढुलाई की जा रही है। आरोप है कि कुछ ट्रांसपोर्टर अधिक कमाई के लालच में क्षमता से अधिक फ्लाई ऐश भरकर हाईवा दौड़ा रहे हैं। रास्ते में उड़ती राख और तेज गति से गुजरते वाहन लोगों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहे हैं।
निजी पोकलेन से दिन-रात लोडिंग का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि ऐश डाईक के भीतर कुछ ट्रांसपोर्टरों ने अपनी निजी पोकलेन मशीनें लगा रखी हैं, जिनसे दिन-रात हाईवा में फ्लाई ऐश भरी जा रही है। आरोप है कि इस दौरान सुरक्षा मानकों और निर्धारित क्षमता का पालन नहीं किया जा रहा। स्थानीय लोगों का दावा है कि रास्ते में रोके जाने पर चालक अलग-अलग ट्रांसपोर्टरों के नाम बताते हैं, जिससे कई कंपनियों के इस परिवहन कार्य में शामिल होने की बात सामने आती है।
उड़ती राख बनी जानलेवा
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, गर्मी में उड़ती फ्लाई ऐश बाइक सवारों और राहगीरों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। कई बार राख आंखों में जाने से वाहन चालक संतुलन खो बैठते हैं। वहीं बारिश में यही फ्लाई ऐश सड़क पर फिसलन पैदा कर दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ा देती है।
जाम से परेशान ग्रामीण
बिंजकोट-दर्रामुड़ा से बड़े जामपाली और कुर्रुभांठा मार्ग तक कई बार हाईवा वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इससे स्कूली बच्चों, किसानों और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ओवरलोड हाईवा पर तत्काल कार्रवाई की जाए, खुले में फ्लाई ऐश परिवहन पर रोक लगे, वाहनों की नियमित जांच हो तथा परिवहन के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सके।।
नोट: समाचार में लगाए गए आरोप स्थानीय ग्रामीणों के दावों पर आधारित हैं। संबंधित कंपनी, ट्रांसपोर्टरों या प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।।




