🎯BIG NEWS:🎯🔥📢 पुरुंगा में फिर फूटा अडानी कोल ब्लॉक का विरोध, 11 नवंबर को सड़क पर उतरने की तैयारी! देखिए वीडियो।🔥📢🔥📢🔥📢🔥

🎯जनसुनवाई स्थगित होने के एक साल बाद फिर लामबंद हुए ग्रामीण, जल-जंगल-जमीन बचाने पुरुंगा, तेंदूमुड़ी और समरसिंघा के लोगों ने भरी हुंकार….🔥🔥🔥
🔥दोबारा जनसुनवाई की सुगबुगाहट के बीच पुरुंगा स्कूल ग्राउंड में जुटे सैकड़ों महिला-पुरुष, बोले—अपने गांव, जंगल और भविष्य की रक्षा के लिए रहेंगे एकजुट | देखें वीडियो
धरमजयगढ़। धरमजयगढ़ के वनांचल में प्रस्तावित मेसर्स अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड की पुरुंगा कोयला परियोजना को लेकर विरोध एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। दोबारा पर्यावरणीय जनसुनवाई कराए जाने की चर्चाओं के बीच पुरुंगा स्कूल ग्राउंड में पुरुंगा, तेंदूमुड़ी और समरसिंघा क्षेत्र के सैकड़ों महिला-पुरुष ग्रामीण एकत्रित हुए। बैठक में प्रस्तावित कोल ब्लॉक के विरोध में एकजुटता प्रदर्शित करते हुए ग्रामीणों ने जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए आंदोलन को फिर से सक्रिय करने का आह्वान किया। 👉क्या कहते हैं श्रोत्रिय विधायक लालजीत राठिया यहां देखें वीडियो…… 👇👇
ग्रामीणों की इस बैठक से स्पष्ट संकेत मिला कि प्रस्तावित कोयला परियोजना को लेकर क्षेत्र में विरोध अभी समाप्त नहीं हुआ है। तीन पंचायतों के ग्रामीण एक बार फिर साझा मंच पर आकर अपने गांव, प्राकृतिक संसाधनों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े सवाल उठा रहे हैं।
11 नवंबर 2025 को स्थगित हुई थी जनसुनवाई
गौरतलब है कि 11 नवंबर 2025 को पुरुंगा स्कूल ग्राउंड में प्रस्तावित कोयला परियोजना की पर्यावरणीय जनसुनवाई आयोजित की जानी थी। ग्रामीणों के भारी विरोध के बीच जनसुनवाई स्थगित कर दी गई थी। अब जनसुनवाई दोबारा कराए जाने की चर्चाओं के बीच ग्रामीणों ने फिर से अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।
ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर चर्चा है कि यदि परियोजना से संबंधित अगली प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो वे अपनी आपत्तियों और मांगों को संगठित तरीके से शासन-प्रशासन तक पहुंचाएंगे। 👉गीत के माध्यम से बुजुर्ग ग्रामीण महिला ने अपनी भावना व्यक्त की यहां देखें वीडियो….. 👇👇
एक साल बाद उसी तारीख पर फिर आंदोलन की तैयारी
इस पूरे घटनाक्रम में 11 नवंबर की तारीख खास महत्व रखती है। पिछले वर्ष इसी दिन जनसुनवाई स्थगित हुई थी और अब ग्रामीण उसी तारीख को एक बार फिर सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं।
पुरुंगा स्कूल ग्राउंड में हुई बैठक को इसी प्रस्तावित आंदोलन की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। बैठक में महिलाओं और पुरुषों की भागीदारी के साथ ग्रामीणों ने आपसी एकता बनाए रखने पर जोर दिया। हालांकि 11 नवंबर को होने वाले कार्यक्रम के अंतिम स्वरूप और प्रशासनिक स्थिति की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। 👉आदिवासी ग्रामीण युवा नेता ने क्या कहा यहां देखें वीडियो…….👇👇
तीन पंचायतों की एकजुटता पर जोर
पुरुंगा, तेंदूमुड़ी और समरसिंघा क्षेत्र के ग्रामीणों का एक मंच पर आना प्रस्तावित आंदोलन का प्रमुख पहलू बनकर सामने आया है। बैठक में गांवों के हितों से जुड़े मुद्दों पर सामूहिक रूप से निर्णय लेने और आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट रहने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
ग्रामीणों के बीच यह संदेश दिया जा रहा है कि मामला केवल किसी एक गांव या जमीन के टुकड़े का नहीं, बल्कि क्षेत्र के जंगल, जलस्रोत, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा है। ग्रामीण शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात शासन-प्रशासन तक पहुंचाने की तैयारी में हैं।
869 हेक्टेयर का प्रस्तावित कोल ब्लॉक, वन भूमि को लेकर चिंता
उपलब्ध परियोजना संबंधी दस्तावेजों के अनुसार, प्रस्तावित पुरुंगा भूमिगत कोयला परियोजना का क्षेत्रफल लगभग 869.025 हेक्टेयर बताया गया है। इसमें करीब 621.331 हेक्टेयर वन भूमि शामिल होने की बात सामने आई है।
वन भूमि का यह बड़ा हिस्सा परियोजना को लेकर पर्यावरणीय चिंताओं को महत्वपूर्ण बनाता है। ग्रामीणों की आशंकाएं जंगल, वन्यजीवों, जलस्रोतों, वनाधिकार, स्थानीय आजीविका और प्राकृतिक संसाधनों पर संभावित प्रभाव से जुड़ी हैं।
परियोजना के संभावित प्रभावों का आकलन आधिकारिक पर्यावरणीय दस्तावेजों और संबंधित विभागों की जानकारी के आधार पर किया जाना जरूरी होगा। वहीं ग्रामीणों की मांग है कि उनकी आपत्तियों और चिंताओं को किसी भी आगामी प्रक्रिया में गंभीरता से सुना जाए।

दोबारा जनसुनवाई की राह में ग्रामीणों की आपत्तियां अहम
पिछले वर्ष जनसुनवाई स्थगित होने और अब ग्रामीणों के दोबारा लामबंद होने से पुरुंगा कोयला परियोजना का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। स्कूल ग्राउंड में हुई बैठक ने संकेत दिया है कि परियोजना से जुड़े किसी भी नए घटनाक्रम पर ग्रामीण अपनी नजर बनाए हुए हैं।
हालांकि, नई जनसुनवाई की तारीख को लेकर आधिकारिक सूचना सामने आने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल ग्रामीणों की ओर से 11 नवंबर को विरोध प्रदर्शन की तैयारी की बात कही जा रही है।
अब निगाहें 11 नवंबर पर टिकी हैं। क्या पिछले वर्ष की तरह इस बार भी ग्रामीणों का विरोध प्रस्तावित कोयला परियोजना के मुद्दे को फिर प्रमुखता से सामने लाएगा? इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा। फिलहाल पुरुंगा, तेंदूमुड़ी और समरसिंघा के ग्रामीणों का संदेश स्पष्ट है—जल, जंगल और जमीन से जुड़े सवालों पर वे अपनी एकजुटता बनाए रखना चाहते हैं।
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