धरमजयगढ़ वनमंडल: जंगलों को आग से बचाने के लिए फायर कैंप साबित हुआ प्रभावी, दावानल घटनाओं में आई कमी…पढ़िए खबर।

धरमजयगढ़ वनमंडल: जंगलों को आग से बचाने के लिए फायर कैंप प्रभावी, घटनाओं में आई कमी धरमजयगढ़ (छत्तीसगढ़), 1 अप्रैल 2025: जंगलों को आग की विभीषिका से बचाने के लिए वन विभाग ने एक सराहनीय पहल की है। धरमजयगढ़ वनमंडल के ओंगना क्षेत्र में स्थापित फायर कैंप इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।
इस कैंप में आधुनिक उपकरणों, विशेष रूप से फायर ब्लोवर, के उपयोग से आग पर तेजी से काबू पाया जा रहा है, जिसके चलते क्षेत्र में आगजनी की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी देखी गई है।वन विभाग ने गर्मियों के मौसम में जंगलों में लगने वाली आग को रोकने के लिए अपनी तैयारियों को और मजबूत किया है। ओंगना में लगाए गए फायर कैंप में प्रशिक्षित कर्मचारी और फायर ब्लोवर जैसे उन्नत उपकरणों की मदद से आग को फैलने से पहले ही नियंत्रित कर लिया जाता है।

फायर ब्लोवर हवा के दबाव से आग को बुझाने में कारगर सिद्ध हुआ है, जिससे न केवल जंगलों को बचाया जा रहा है, बल्कि वन्यजीवों और जैव विविधता की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो रही है।स्थानीय वन अधिकारियों के अनुसार, फायर कैंप की स्थापना के बाद से आगजनी की घटनाओं में कमी आई है। जहां पहले सूखी पत्तियों और गर्म हवाओं के कारण छोटी-सी चिंगारी भी बड़े दावानल का रूप ले लेती थी, वहीं अब समय रहते कार्रवाई से नुकसान को न्यूनतम किया जा रहा है।

एक के एक अधिकारी ने बताया, “हमारी टीम पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है। फायर कैंप के जरिए निगरानी और त्वरित कार्रवाई संभव हो पाई है, जिसका सकारात्मक असर दिख रहा है।”इस पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिला है, बल्कि स्थानीय समुदाय में भी जागरूकता बढ़ी है।

ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग के प्रयासों से उनके आसपास के जंगल सुरक्षित हुए हैं, जिससे उनकी आजीविका और स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। धुआं और प्रदूषण में कमी के कारण लोगों को सांस लेने में हो रही परेशानी भी कम हुई है।वन विभाग का यह प्रयास अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकता है।

विभाग अपनी ओर से पूरे संसाधनों और समर्पण के साथ जंगलों को आग से बचाने में जुटा है। ऐसी पहल को बढ़ावा देने और तकनीक के साथ-साथ सामुदायिक सहयोग बढ़ाने से जंगल संरक्षण में और बेहतरी लाई जा सकती है।धरमजयगढ़ वनमंडल का यह फायर कैंप न सिर्फ जंगलों की रक्षा का प्रतीक बन रहा है, बल्कि यह भी साबित कर रहा है कि समयबद्ध और तकनीकी रूप से सही कदम प्रकृति को बचाने में कितने प्रभावी हो सकते हैं।।
