LATEST NEWS: Head line रायपुर राजधानी में घुमकुड़िया उराॅव आदीवासी युवा समाज द्वारा विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया।

🔥विश्व आदिवासी दिवस पर बिरसामुंडा की भव्य प्रतिमा रायपुर राजधानी स्थापित करने हेतु ज्ञापन।
घुमकुड़िया उराॅव आदिवासी युवा समाज छत्तीसगढ़ के द्वारा 9 अगस्त, 2025 को विश्व आदिवासी दिवस रायपुर में आयोजित किया गया। जिसमें बढी की संख्या में आदिवासी समाज के सदस्य पारंपरिक परिधानों में सजे धजे सड़कों पर उतरे। गुरुनानक हॉल तेलीबाँधा मे कार्यक्रम का शुभारंभ अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते हुए आदिवासी नारों के साथ शुरुआत की गई। वक्तागणो ने आदिवासी अधिकारों, संरक्षण, रीति रिवाज, आदिवासी एकता एवं पेशा अध्ययन 1996 ,2022 के बारे में लोगों को जानकारी दी।बाइक रैली कार्यक्रम की शुरुआत गुरुनानक हॉल तेलीबाँधा रायपुर से भव्य बाइक रैली के साथ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं ने पारंपरिक झंडे और नारों के साथ हिस्सा लिया।इसके बाद बडी की संख्या में आदिवासी समाज के सदस्य पैदल रैली के रूप में नगर के मुख्य मार्गों वे अम्बेडकर चौक रायपुर पहुंचे।

आदिवासी समाज के लोगों ने लगाए नारे: ” डॉ. अम्बेडकर अमर रहे” “बिरसा मुंडा की जय” और “एक तीर, एक कमान – आदिवासी एक समान” जैसे जोशीले नारों से रायपुर राजधानी में गूंज उठीं। धुमकुडिया उराॅव युवा समाज छत्तीसगढ के प्रदेशअध्यक्ष मनीष टोप्पो ने महामहिम राज्यपाल द्वारा भेजे गए अधिकारी को 10 बिन्दुओं पर आदिवासियों की समस्या एवं मांग पत्र समाज के सामने पड़कर सौंपा गया एंव स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा जी की भव्य प्रतिमा रायपुर राजधानी बस स्टैंड भाटा गाँव के सामने सड़क पर स्थापित करने का आवेदन दिया।जिसमें संगठन के जिलाध्यक्ष अजय कुजूर एवं संगठन के पदाधिकारी, वक्ता गण नीलम टोप्पो, विक्रम सिंह लकड़ा, सूशील लकड़ा, रश्मी किसकोट्टा, आमोद कुजूर, कन्ता क्रेरकेटा, संजय इक्का, अविरला इक्का, उर्मिला क्रेरकेटा, अमित इक्का, जैनित खलखो , अभय क्रेरकेटा, जय प्रकाश उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में पारंपरिक आदिवासी नृत्य एवं संगीत की शानदार प्रस्तुतियों ने माहौल को जीवंत बना दिया. उराॅव नृत्य, मांदर नृत्य और उराॅव समाज के धनकुर गायन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. युवक-युवतियों और बच्चों का पारंपरिक परिधान में शामिल होना पूरे आयोजन को और भी रंगीन बना गया।

आदिवासी समाज ने दिया एकजुटता का संदेश विश्व आदिवासी दिवस पर रायपुर में आयोजित यह भव्य कार्यक्रम केवल उत्सव नहीं, बल्कि आदिवासी गौरव, एकता और सांस्कृतिक धरोहर के प्रति संकल्प का प्रतीक बन गया. रैली से लेकर जनसभा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक, हर क्षण ने यह संदेश दिया कि समाज अपनी परंपराओं, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट है और आने वाली पीढ़ियों को यह विरासत सौंपने के लिए दृढ़ संकल्पित है.




