BlogLatest News

🔴📢🎯SOCIAL NEWS **“🎯इज्जत शिकायत से नहीं, अपराध से जाती है”….POCSO Act पर राष्ट्रीय वेबिनार में समाज को झकझोरा, बच्चों की सुरक्षा को लेकर गूंजा कड़ा संदेश**🎯📢🔴


वरिष्ठ पत्रकार बुधराम अग्रवाल की खास रिपोर्ट…✍️। छाल।
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या 25 जनवरी को बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों और उनकी सुरक्षा को लेकर ह्यूमन राइट्स संगठन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय वर्चुअल वेबिनार ने समाज की चुप्पी पर करारा प्रहार किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री खेम सिंह चौहान ने की, जिन्होंने दो टूक शब्दों में कहा—

“बच्चे हमारे समाज का भविष्य हैं। उनकी सुरक्षा में लापरवाही सीधे-सीधे अपराध को बढ़ावा देना है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक समाज जागरूक नहीं होगा, तब तक बच्चों के खिलाफ अपराध रुक नहीं सकते।


POCSO Act सिर्फ कानून नहीं, बच्चों के सुरक्षित बचपन की ढाल

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 बच्चों की गरिमा और सम्मान की रक्षा के लिए बना सख्त कानून है। इसमें 18 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चे शामिल हैं और यह कानून लड़के-लड़कियों में कोई भेद नहीं करता

उन्होंने बताया कि जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है—चाहे वह मोहल्ला बैठक हो, स्कूल कार्यक्रम, पोस्टर अभियान हो या सोशल मीडिया और वेबिनार।


पुलिस वर्दी नहीं, डर नहीं—कानून बच्चों के साथ है

हरीकृष्ण पासवान, प्राचार्य लॉ कॉलेज ने जानकारी दी कि POCSO मामलों में बच्चों से पूछताछ पुलिस वर्दी में नहीं की जाती। महिला अधिकारी द्वारा सुरक्षित वातावरण में पूछताछ की जाती है ताकि बच्चा भयमुक्त होकर सच बता सके। उन्होंने कानून की धाराओं की विस्तार से व्याख्या की।


ऑनलाइन दुनिया बना नया खतरा

एडवोकेट कुमार धनंजय (इलाहाबाद हाई कोर्ट) ने कहा कि बच्चों की फोटो-वीडियो लेकर ब्लैकमेल करना भी गंभीर अपराध है। कई बार अपराधी शिक्षक, रिश्तेदार या भरोसेमंद व्यक्ति होते हैं, जिससे अपराध और अधिक संगीन हो जाता है।


मोबाइल, इंटरनेट और माता-पिता की जिम्मेदारी

एडवोकेट सफदर अहमद सिद्दीकी (बॉम्बे हाई कोर्ट) ने बच्चों से जुड़े यौन अपराधों के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि आज ऑनलाइन फ्रॉड और फर्जी आईडी के जरिए बच्चों को फंसाने के मामले तेजी से बढ़े हैं।
उन्होंने माता-पिता से बच्चों के मोबाइल उपयोग पर नजर रखने, स्क्रीन टाइम सीमित करने और बच्चों से खुलकर संवाद रखने की अपील की।


Good Touch–Bad Touch की समझ हर बच्चे को जरूरी….

एडवोकेट डॉ. राजकुमार चौहान (इलाहाबाद व दिल्ली हाई कोर्ट) ने कहा कि बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव, डर या चुप्पी गंभीर संकेत हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि POCSO Act में—

  • बच्चे की पहचान पूरी तरह गोपनीय रहती है
  • अपराधी से आमना-सामना नहीं कराया जाता
  • 2 महीने में जांच पूरी कर मामला अदालत में पेश किया जाता है
  • पीड़ित को सरकार द्वारा मुआवजा, आर्थिक सहायता और पुनर्वास दिया जाता है

उन्होंने दोहराया—

“गलत देखकर चुप रहना भी अपराध को बढ़ावा देना है।”


स्कूलों पर भी कानूनी जिम्मेदारी…..

कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय महासचिव एम. वहीद सिद्दीकी ने कहा कि स्कूलों और संस्थाओं को Child Safety Policy, स्टाफ वेरिफिकेशन, CCTV और गोपनीय शिकायत प्रणाली अनिवार्य रूप से लागू करनी होगी।


संगठनात्मक फैसला: यूपी को मिला नया कार्यकारी अध्यक्ष…..

वेबिनार के समापन पर एडवोकेट डॉ. राजकुमार चौहान के प्रस्ताव पर श्री राम अवतार शर्मा को उत्तर प्रदेश का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जिसे राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री खेम सिंह चौहान ने मंजूरी दी।


Aslam Khan

मेरा नाम असलम खान है, मैं MaandPravah.com का संपादक हूँ। इस पोर्टल पर आप छत्तीसगढ़ सहित देश विदेश की ख़बरों को पढ़ सकते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button