🔴📢🔥BIG NEWS:🔥VIP बेटा, टूटी बाइक और ज़िंदगी से जूझता युवक!हिट एंड रन में विधायक रेणुका सिंह का बेटा लक्की सिंह गिरफ्तार — दो दिन तक क्यों सोती रही पुलिस…पढ़िए खबर?🔥📢🔥🔴

हिट एंड रन में विधायक रेणुका सिंह का बेटा लक्की सिंह गिरफ्तार — दो दिन तक क्यों सोती रही पुलिस?
छत्तीसगढ़ | रायपुर | विशेष रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सत्ता, सिस्टम और VIP कल्चर को कटघरे में खड़ा करने वाली सनसनीखेज खबर सामने आई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री व वर्तमान भाजपा विधायक रेणुका सिंह के बेटे बलवंत सिंह उर्फ लक्की सिंह को आखिरकार पुलिस ने हिट एंड रन मामले में गिरफ्तार कर लिया है।
लेकिन गिरफ्तारी से बड़ा सवाल यह है —
क्या कानून VIP घरानों के दरवाज़े पर पहुंचते ही धीमा पड़ जाता है?

सड़क पर तड़पता रहा युवक, VIP बेटा फरार
घटना तेलीबांधा थाना क्षेत्र के अग्रसेन धाम चौक के पास की है, जहां तेज रफ्तार वाहन ने बाइक सवार युवक को बेरहमी से रौंद दिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और युवक सड़क पर लहूलुहान होकर तड़पता रहा।
लेकिन हादसा करने वाला चालक —
न रुका…
न मदद की…
और मौके से फरार हो गया।
घायल युवक 34 वर्षीय त्रिभुवन ठाकुर अब भी अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है।
जन्मदिन पर खून का तोहफा!
दो दिन पहले विधायक रेणुका सिंह का जन्मदिन था।
और बेटे लक्की सिंह ने ऐसा “तोहफा” दिया —
जिसकी कीमत आज एक युवक अपनी जान से चुका रहा है।
एक तरफ जन्मदिन की बधाइयाँ,
दूसरी तरफ ICU में मौत से लड़ता त्रिभुवन।
CCTV में कैद अपराध, फिर भी दो दिन की चुप्पी
घटना स्थल पर लगे CCTV कैमरों में पूरा हादसा रिकॉर्ड हुआ।
प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी पुलिस के पास थे।
वाहन की पहचान भी हो चुकी थी।
फिर सवाल उठता है —
जब सबूत थे, तो गिरफ्तारी में दो दिन क्यों लगे?
क्या वजह सिर्फ इतनी थी कि आरोपी एक विधायक का बेटा है?

कानून सबके लिए बराबर या VIP के लिए अलग?
आम आदमी के लिए थाने के दरवाजे तुरंत खुलते हैं,
लेकिन VIP बेटों के लिए कानून सोच-विचार करता है?
जनता पूछ रही है —
- अगर आरोपी किसी आम परिवार से होता तो क्या इतनी मोहलत मिलती?
- क्या सत्ता की परछाईं में कानून की आंखों पर पट्टी बंध जाती है?
- क्या VIP नंबर प्लेट कानून से बड़ी हो गई है?
पीड़ित परिवार इंसाफ की गुहार में
अस्पताल में भर्ती त्रिभुवन ठाकुर के परिजन न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
परिजनों का साफ कहना है —
“नाम बड़ा हो या छोटा, सज़ा एक जैसी होनी चाहिए।
बेटा किसी विधायक का हो या मजदूर का — कानून बराबर होना चाहिए।”
राजनीति गरम, पुलिस कटघरे में
गिरफ्तारी के बाद विपक्ष ने VIP कल्चर पर तीखा हमला बोला है।
पुलिस निष्पक्षता का दावा कर रही है, लेकिन सवाल अब भी जिंदा हैं —
- आरोपी हादसे के बाद फरार कैसे हुआ?
- दो दिन तक पुलिस क्यों खामोश रही?
- क्या दबाव में कार्रवाई टाली गई?
हिट एंड रन अब नहीं, गंभीर आपराधिक कृत्य
इस मामले में BNS की धारा 115(2) के तहत केस दर्ज किया गया है —
धारा 115(2) – खतरनाक तरीके से गंभीर चोट पहुंचाना
यदि कोई व्यक्ति लापरवाही या जानबूझकर ऐसे साधन से चोट पहुंचाता है जो जानलेवा हो (जैसे तेज रफ्तार वाहन) —
तो यह गंभीर अपराध है।
सजा: 10 साल तक की कैद + जुर्माना
पुलिस ने मामले को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर “Sensitive Case” श्रेणी में डाला है।
सड़कों पर गूंजता सवाल
राजधानी की सड़कों पर आज एक ही सवाल गूंज रहा है —
क्या कानून सच में सबके लिए बराबर है?
या VIP के लिए अलग रास्ता है?




