
असलम खान धरमजयगढ़✍️: धरमजयगढ़ की जनता इन दिनों दोहरी मार झेल रही है — एक तरफ अघोषित बिजली कटौती की यातना, दूसरी तरफ बढ़ते हुए बिजली बिलों की लूट। यह विडंबना नहीं तो और क्या है कि जिस राज्य में “रोशनी का अधिकार” शासन की उपलब्धियों में गिना जाता है, उसी राज्य के गांव-गांव, मोहल्लों और कस्बों में लोग अंधेरे में डूबे हुए हैं।
दिन में कई-कई बार घंटों की कटौती, बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली गुल — ये अब अपवाद नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की हकीकत बन चुकी है। गर्मी में पंखे बंद, सर्दी में हीटर ठंडे, और बरसात में ट्रांसफार्मर जलने की घटनाएं — यह सब मिलकर आम आदमी के सब्र का बांध तोड़ रहे हैं।
सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि जिस समय जनता अंधेरे में कराह रही है, उसी समय उनके बिजली बिल आसमान छू रहे हैं। स्मार्ट मीटर के नाम पर जो नई तकनीक लाई गई थी, वह अब जनता के लिए “स्मार्ट लूट” बन चुकी है। बिना उपयोग के भी बढ़ते यूनिट, गलत रीडिंग, और मनमाने बिल — ये सब किसी तकनीकी गलती नहीं, बल्कि योजनाबद्ध आर्थिक दोहन की बू देते हैं।
लोग पूछ रहे हैं – जब मीटर ‘स्मार्ट’ है तो बिल ‘बेवकूफी भरा’ क्यों? क्या सरकार और बिजली विभाग के पास इसका कोई जवाब है? आखिर कौन तय करेगा कि जनता को कब, कितनी बिजली मिलेगी और उसके बदले कितना वसूला जाएगा?

रायगढ़ जिले में उद्योगों और खदानों के लिए 24 घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध है, लेकिन जब पीपी बात आम उपभोक्ता की आती है तो अचानक “लाइन ट्रिप” और “मेंटेनेंस” का बहाना सामने आ जाता है। यही दोहरा मापदंड जनता के भीतर गुस्सा और असंतोष को बढ़ा रहा है।
अब वक्त आ गया है कि सरकार इस बिजली-नीति पर पुनर्विचार करे।
जनता अब अंधेरे में रहने की आदी नहीं है — वह पूछेगी, बोलेगी और जवाब भी मांगेगी।
बिजली विभाग अगर जनता की सेवा के लिए है, तो उसे अपनी प्राथमिकताएं तय करनी होंगी — वरना यह अंधेरा केवल गलियों तक सीमित नहीं रहेगा, यह विश्वास और व्यवस्था के हर कोने में फैल जाएगा।
धरमजयगढ़ की जनता अब सिर्फ रोशनी नहीं, जवाब चाहती है।।




