💥🔥SARCASTIC ARTICLE:🔥 “हर घर नल से जल” नहीं, “हर टंकी में छल!” — पेलमा की टंकी में विकास नहीं, ‘ड्रामा’ उबल रहा है साहब!🔥🔥💥

✍️ व्यंग्य लेख :
रायगढ़।
सरकार के “महत्वाकांक्षी” जल जीवन मिशन ने अब गांवों में पानी से ज़्यादा चर्चा हास्य की बहा दी है।
और इसका ताज़ा एपिसोड है — ग्राम पंचायत पेलमा, जहां करीब 50 हजार लीटर की पानी टंकी ऐसे खड़ी है जैसे कोई सेल्फी प्वाइंट, लेकिन उसमें पानी नहीं, बस ठेकेदारी की अकड़ और विभागीय लापरवाही का फोम भरा है।
सरकार का नारा है — “हर घर तक नल से जल।”
लेकिन पेलमा के लोग कहते हैं — “हर गड्ढे तक दलदल!”
टंकी बनी, पर पानी नहीं।
पाइप बिछे, पर सप्लाई नहीं।
जिम्मेदार हैं, पर जिम्मेदारी नहीं।
ठेकेदार धर्नुजय सिंह का नाम सुनते ही गांव वाले अब पाइप नहीं, ब्लड प्रेशर मॉनिटर तलाशते हैं — कहीं गुस्से में प्रेशर न बढ़ जाए!

🧱 “आओ बनाओ और मिटाओ” योजना का पेलमा संस्करण!
गांव की गलियों में जो कंक्रीट का काम हुआ, उसे देखकर खुद सीमेंट कंपनी वाले भी शर्मा जाएं।
काम पूरा होते ही जेसीबी से कंक्रीट तोड़कर फेंक दिया गया — शायद यह भारत का पहला “आओ बनाओ और मिटाओ” अभियान था।
अब सड़कों की हालत ऐसी है कि वाहन चलाना योग का नया आसन बन गया है —
“बैलेंसासन विद गड्ढासन!”
जब ग्रामीणों ने पूछा — “भैया, ये क्या मज़ाक है?”
तो ठेकेदार बोले — “फिर से डालवा देंगे!”
अब यह लाइन गांव में उतनी ही लोकप्रिय है जितनी चुनावी घोषणा — “अगली बार पक्का करेंगे।”
महीनों बीत गए, न कंक्रीट लौटी, न पानी बहा — बस आश्वासन का फव्वारा चालू है।
🧾 निरीक्षण या फोटोशूट?
पीएचई विभाग के अफसर आते हैं, “निरीक्षण” करते हैं — यानी फोटो खींचते हैं, हेलमेट पहनते हैं, गंभीर चेहरा बनाते हैं और लौट जाते हैं।
रिपोर्ट में लिखा जाता है — “कार्य प्रगति पर है।”
ग्रामीण पूछते हैं — “किधर प्रगति पर है?”
जवाब नहीं, बस सरकारी चुप्पी का जलप्रवाह।
अब गांव के लोग खुद ही नाम रख चुके हैं —
“जल जीवन मिशन” नहीं, “जलजमाव मिशन”।
जहां टंकी है, वहां पानी नहीं; और जहां पानी है, वहां निकासी नहीं।
💧 अंतिम प्रश्न – कब बुझेगी यह प्यास?
क्या प्रशासन अब भी इस “विकास की हवाई टंकी” को आसमान में लटकता देखता रहेगा,
या फिर इस घटिया निर्माण के ठेकेदारों और अफसरों की “प्यास बुझाने” के लिए जांच की बाल्टी डालेगा?
क्योंकि फिलहाल तो ग्रामीण यही कह रहे हैं —
“यह टंकी सरकार की है या मृगतृष्णा की?
हर घर नल से जल नहीं मिला,
हर गली में गड्ढा जरूर खिला!”




